Search

Loading

Tuesday, August 4, 2009

जयपुर का जवाहरात उद्योग व वैश्विक मंदी भाग 2

इन सारी परिस्थितियों ने जयपुर के जवाहरात उद्योग को संकट में ला दिया है. शुरू में लोग काफी घबराए हुए भी थे परन्तु अब धीरे धीरे परिस्थिति में बदलाव आ रहा है। लोग घबराहट के माहौल से बहार निकल कर फिर से काम की नई शुरुआत करने लगे हैं। परन्तु अब समस्या सिर्फ़ बिक्री की नही रही कुछ और ज्यादा जटिल समस्याओं से जवाहरात उद्योग एवं व्यापार को रुबरु होना पड़ रहा है। माल के बिक्री की समस्या के साथ जो सब से बड़ी समस्या है वो है वसूली की।

पेमेंट: भुगतान की स्थिति काफी ख़राब है। देश व विदेश में बेचे हुए माल का पैसा नहीं आ रहा या बहुत देर से आ रहा है. इससे लगातार तरलता व नगदी की समस्या बनी हुई है। आम तौर पर जयपुर के व्यापारी अपनी पूंजी से व्यापार करते हैं। बैंक से पैसा उधर लेने की प्रवृत्ति अपेक्षा कृत रूप से कम है। इस लिए यहाँ बेचे हुए माल की रकम डूबने की आशंका नगण्य है। परन्तु उधारी की अवधि लम्बी होती जाने से दिन प्रति दिन के खर्चे में दिक्कत आ रही है। विदेशों में खास कर अमेरिका में लंबा पैसा डूबने का ख़तरा अभी भी बना हुआ है।

कारीगर: मंदी के कारण मैनुफक्चारिंग में बहुत कमी आई है जिसके कारण कारीगर बेरोजगार हो गए। लंबे समय तक काम नहीं मिलने के कारण उनलोगों ने जवाहरात की कारीगरी छोड़ कर कोई दूसरा काम ढूंढ़ लिया। इन दिनों गांवों में काम देने की अनेक सरकारी योजनायें भी लागु हो गई जिसमे रोजगार गारंटी योजना प्रमुख है। इस कारण आसपास के गांवों से आने वाले कारीगर उन सरकारी कामों में लग गए। किछ लोग अपने गाँव में रह कर कैरकी (बिड्स) बनाने का या बिंधाई का काम करते थे, गाँव में मजदूर सस्ते होने के एवं अन्य खर्चे कम होने के कारण उन लोगों की लागत कम आती थी। वो लोग जयपुर ला कर व्यापारियों को अपना माल सस्ते में बेच देते थे। इस तरह से व्यापारियों को भी अच्छा मुनाफा होता था। कुछ लोग उनलोगों के कारखाने में अपना माल भी बनवाते थे जिस से माल की लागत भी कम आती थी व माल जल्दी बन जाता था। मंदी के कारण उन लोगों में से भी बहुतों ने अपना कारखाना बंध कर दिया।
इन सभी कारणों से अब कारीगरों की कमी हो रही है। अभी भी लोगों ने ज्यादा उत्पादन शुरू नहीं किया है इस लिए ये तकलीफ व्यापक रूप से महसूस नहीं हो रही है लेकिन भविष्य में ये एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आयेगी।
जयपुर का जवाहरात उद्योग व वैश्विक मंदी भाग 1
Important post for investors



क्रमशः......................................

allvoices

1 comment:

Michael said...

Rajesh Bothra was born in Mumbai 1968, in Marwari family from a Rajaldesar village in Rajasthan. When he was aged about 16. He decided to quit his further studies, because his ambition was to become an excellent businessman. After quitting his studies he decided to start his business. In Present days his Business is popular by brand name Mercury, which is sold and uses his product Worldwide by common people.